भारतकी नेस्ले युनियन्सने हासील की मान्यता और वेतनकी बहसका अधिकार ।

करीब 1200 कामगारोंका प्रतिनिधीत्व करनेवाली भारतके मोगा, पोंडा तथा बिचोलिमके नेस्ले फैक्टरियोंके मजदुरोंकी युनियनको 2009 के आखरी सप्ताहमे बडी जीत हासील हुइ । सालभर चल रहे उनके वेतनकी बहसके अधिकारके दिर्घ संघर्षके बाद पहली बार युनियनने वेतन तथा अन्य सुविधाओंके सांझे समझौतेपर दस्तखत किये । लंबे अर्सेसे चल रहे उनके संघर्षकी यह बहुत बडी उपलब्धी है । समझौतेमे वेतनश्रेणी तथा वेतनकी जानकारीकोभी शामील किया है जो की व्यवस्थापनने पहले ‘ गोपनीय ’ करार दी थी । यह उपलब्धी और भी स्पृहणीय है क्युंकी नेस्ले ‍इंडीया के व्यवस्थापनने पोंडा़ गोवा की युनियनको मान्यता देनेसे इऩकार किया था जब 2001 मे उसकी स्थापना हुइ थी । और फिर यह एक कानुनी मुकदमा बना जो व्यवस्थापनने करीब 54 बार सुनवाई रुकवाकर आठ सालतक जानबुझकर चलाया ।

नवंबर 2008 मे आय यु एफसे जुडी फेडरेशन ऑफ ऑल इंडीया नेस्ले एम्प्लॉइजने ‍इकतरफा लादे गये सालाना वेतन बढोत्रीकी व्यवस्थाका अंत करने और वेतनके लिए बहस करनेके कामगारोंके अधिकार बहाल किये जाने की माँग की । नेस्ले ‍इंडीया व्यवस्थापनने बहस करनेसे ‍इंकार किया और चारो फैक्टरियोंकी (मोगा, समालखा, पोंडा, बिचोलिम) 50 से 200 मीटरकी दुरीपर युनियनकी गतिविधीयोंपर हमेशाकी रोक लगानेवाले कानुनी आदेश जारी करवाये ।

इसने आक्रमक कॅम्पेनको जन्म दिया। 16 अप्रैल 2009 को शुरु किये गये ‍इस मोहीममे हफ्तेभरके निदर्शनोंका कार्यक्रम चलाया गया और जिसका समापन नेस्ले इंडीयाके दिल्लीके बाहर गुरगांव स्थित मुख्यालयपर 25 मई 2009 को आयोजित एक रॅली मे हुआ । इस मोहीमको आय यु एफने शुरुसेही पुरा समर्थन दिया और मई 2009 मे नेस्ले व्यवस्थापनके खिलाफ बहुराष्ट्रीय कंपनियोंके लिए बनायी गयी OECD की मान्यताओंके उल़लंघनके बारेमे अदालतमे मुकदमा दायर किया ।

हर हफ्ते हर फॅक्टरीके गेटपर किये निदर्शन और नेस्ले ‍इंडीयाके मुख्यालयपर आयोजित रॅलीके साथही पोंडा और बिचोलिमके युनियन सदस्योंने कंपनी पुरस्कृत सभी कार्यक्रमोंपर बहिष्कार डाला और करीब 6 महिनोंसे ज्यादा अर्सेसे ओव्हर टाईम करना बंद कर दिया था । खानेकी चीजोंकी बढती हुई महंगाई उनके वेतनको पहलेही नोच रही है ऐसेमे उनका यह बहिष्कार और ओव्हर टाईम करनेसे इंकार करना बहुतही बडा त्याग था ।

स्थानिक, राष्ट्रीय तथा आंतरराष्ट्रीय स्तरपर बढते रहे इस दबावके कारन नेस्ले इंडीया व्यवस्थापनने आखिर पहली बार सितंबरमे वेतनके बारेमे बहस शुरु की और दिसंबरमे यह बहस नतीजेपर पहुंची । दशकोंसे चल रहे अधिकारोंके हनन के बाद ट्रेड युनियनके अधिकार का सही मानेमे आदर और मान्यताकी तरफ बढा यह महत्वपूर्ण कदम है ।

नेस्ले इंडीयाकी सबसे नयी और सबसे बडी पंतनगरकी फॅक्टरीमे वेतनकी बहस फिलहाल चल रही है जहां कामगारोंने अप्रैल 2009 मे आक्रमक उद्रेकके रुपमे युनियनकी स्था‍पना की। युनियनपर हुए हमलोंके बावजूद , युनियनके पंजीकरणको व्यवस्थापनने किये विरोधके बावजूद यु‍नियन कानूनी मान्यता पानेमे कामयाब रही और तुरंतही आय यु एफसे संलग्न फेडरेशनसे जुड गयी । फेडरेशनकी समर्थनके कारन नेस्ले पंतनगरकी युनियन को वेतनके बहसके अधिकार बहाल हुए है ।

31 दिसंबर 2009 को युनियन्सने आय यु एफसे समर्थनके लिए उसे शुक्रगुजारीका संदेश भेजा है ।

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