
ताजा कॅज्युअल-टी : युनिलिव्हर लेबर कॉन्ट्रॅक्टरके रिश्तेदारोंने किये हमले के बाद खानेवाल ऍक्शन कमिटीके सदस्य अब्दुल अझीझ अस्पतालमे दाखील ।
गये दो दशकोंसे युनिलिव्हर पाकिस्तानके लिप्टन चाय फॅक्टरीमे चल रहे डिस्पोजेबल जॉब की प्रथाको चुनौती दी जानेके कारन अबतक लाभदायक रहा लेबर सप्लायका ठेका हाथसे निकल जानेकी संभावना बढतेही ठेकेदारोंने फॅक्टरी व्यवस्थापनके साथ जाल बिछाकर, युनिलिव्हरसे सिधे तथा स्थायी नौकरीके हकोंके लिए लड रहे कामगारोंपर हिंसक हमले करवाना शुरु किया है । आय. यु. एफ. ने OECD के पास खानेवालमे युनिलिव्हर द्वारा अस्थायी कामगारोंके हो रहे बढते तथा निरंतर इस्तेमालसे बहुराष्ट्रीय कंपनियोंके लिए OECD ने बनाये गाइडलाइन्स (मार्गदर्शक तत्व) का उल्लंघन होनेकी शिकायत दर्ज की थी । उस शिकायतपर OECD के युके नॅशनल कॉन्टॅक्ट पॉइंटने सरकारी हस्तक्षेपसे चर्चा करके कुछ निर्णय लेनेका आवाहन किया, उसके बाद लेबर कॉन्ट्रॅक्टर्सका यह उकसाना शुरु हुआ ।
31 अगस्तकी नाइटशिफ्टमे युनिलिव्हर खानेवालके मुख्य लेबर कॉन्ट्रॅक्टर रियाझ अहमद ऍन्ड ब्रदर्स के रिश्तेदारोंने ऍक्शन कमिटीके सदस्योंपर हिंसक हमला करवाया जिसमे तीन कामगार जख्मी हुए । अब्दुल अझीझ की सरपर गहरी चोट लगने के कारन उसे अस्पतालमे भरती होना पडा, शहजाद कलिमका अंगुठा फ्रॅक्चर हुआ और खिज्र हयातको मामुली चोट आयी ।
इस सालकी शुरुवातमे लिप्टन फॅक्टरी व्यवस्थापनके साथ मिलकर कपटसे लेबर कॉन्ट्रॅक्टर्सने नये ठेका मजदुर कामपर रखनेपर मची खलबली के संदर्भमे ऍक्शन कमिटी सदस्योंपर यह हिंसक हमले हुए । वैश्विक स्तरपर चलाये गये कॅज्युअल-टी अभियानके कारन युनिलिव्हरपर बडा दबाव था । फॅक्टरी व्यवस्थापनने लेबर कॉन्ट्रॅक्टर्सको जितने मुमकिन हो सके उतने उनके रिश्तेदारोंको कामपर रखनेके लिए प्रोत्साहित किया, ताकि व्यवस्थापनके इशारेपर इस अभियानका विरोध करनेवाला एक गुट बन सके । लेबर कॉन्ट्रॅक्टर्सके रिश्तेदारोंमेंसे यां उनके गाववालोंमेसे नये कॉन्ट्रॅक्ट कामगारोंको नियुक्त किये जानेवाली बातके दो परिणाम हुए –
पहला यह की अब व्यवस्थापनको ऍक्शन कमिटी कामगारोंके कामके दिन कम करके उनका दमन करना और नये कामगारोंसे उनका काम करवा लेना मुमकिन हुआ । जैसेही कामके दिनोंमे स्पर्धा बढ गयी, नये लिये गये – ठेकेदारके रिश्तेदार ठेका मजदुरोंको पुराने ठेका मजदुरोंकी तुलनामे ज्यादा लाभ देनेके हेतूसे काम का विभाजन तथा मजदुरीके दरोंमेभी भेदभाव शुरु किया गया । (हमारी वेब साइट ‘वर्किंग ऍट लिप्टन कॅज्युअल-टी’ इस लेखमालाके भाग 5 मे इसकी अधिक जानकारी उपलब्ध है । ) नौकरीकी सुरक्षितता के लिए लड रहे कामगारोंको इस सजाने गरिबी, कर्जे तथा असुरक्षितताकी गहरी खाई मे ढकेल दिया ।
दुसरा यह की कॉन्ट्रॅक्टर के रिश्तेदार रहे नये ठेका मजदुरोंकी हितोंका कॉन्ट्रॅक्टरके हितोंसे जुडे होनेके कारन इस गुटका निर्माण करके व्यवस्थापनको 90 प्रतिशत कामगारोंको असुरक्षित रखनेवाले डिस्पोजेबल नौकरियोंकी इस प्रथाका समर्थन करना मुमकिन हुआ ।
16 जूनको आय. यु. एफ. ने जाहीर इशारा दिया की, “नये अस्थायी मजदुरोंको कामपर रखा है क्युं की गरीबीका भद्दा मजाक उडानेवाले मजदुरीके दरोंके लिए स्पर्धा बढाकर युनिलिव्हर व्यवस्थापन जानबुझकर विभाजनको बढावा दे रहा है। शायद उन्हे किसी हिंसक घटना की अपेक्षा है जो ऍक्शन कमिटीपर भविष्यमे हमला करनेका बहाना बनेगी । ”
31 अगस्तका उकसाना ठिक वैसाही था जैसी हिंसक घटनाके लिए व्यवस्थापन कॅज्युअल टी फॅक्टरीमे अपनी सेना जमा रहा था । ऍक्शन कमिटीने अपने सभी सदस्योंसे ऐसी उकसानेवाली घटनापर कोई प्रतिक्रिया न देनेका आवाहन किया है लेकिन ऍक्शन कमिटीके सदस्योंके साथ हमेशा हो रहे भेदभावपूर्ण व्यवहारसे जैसे हालात बिगडते है और भावनाओंका उद्रेक होता है, मजदुरोंके दो गुटोंके बीच तणाव बढता है और स्थिती विस्फोटक बनती है । युनिलिव्हर व्यवस्थापन लेबर कॉन्ट्रॅक्टर्सके साथ मिलकर ऍक्शन कमिटीके सदस्योंको उकसाकर तथा उन्हे अपमानित करके भेदभाव और गरीबीके बलबूतेपर खडी तथा उनके लिए लाभदायक रही यह व्यवस्था बरकरार रखनेकी और लंबे अरसेसे चल रही इस व्यवस्थाको चर्चासे बदलनेपर रोक लगानेकी पुरी कोशीशमे है ।
खानेवालकी लिप्टन चाय फॅक्टरीमे हो रही हिंसाके लिए आय. यु. एफ. सिधे युनिलिव्हरकोही जिम्मेदार मानता है ।
युनिलिव्हरको संदेश भेजनेके लिए यहाँ क्लिक करे । कॉर्पोरेट व्यवस्थापनसे कहे की उकसाना बंद करे और चर्चा शुरु करे !
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