“ मजदूर सद्-भावना कुटी ” SPKMF के सदस्योंकी उनके परीवारोंके साथ वेतनके लिए बहसके अधिकार पानेके लिए रॅली ।
दो महिनोंके ट्रेड युनियन आंदोलन तथा चर्चामे आय यु एफसे जूडे मिवॉन फूड्स वर्कर्स युनियन (SPKMF) पीटी किरीन मिवॉन फूड्स के साथ एक करारनामेतक पहूंची है जिसमे वेतनके लिए बहसके युनियनके अधिकारको संरक्षण दिया गया है । यह एक ऐतिहासिक जीत है क्युं की पहली बार किसी युनियनको पीटी किरीन मिवॉन कंपनीसे (जपानकी बहुराष्ट्रीय कंपनी किरीन और कोरीया के डायझॅंगकी दक्षिणी सुमात्राके लॅंपंग स्थित जॉइंट व्हेंचर कंपनी) वेतनकी बहसमे कामयाबी हासील हुई है ।
SPKMF ने जनवरी 2010 मे बहसका प्रस्ताव रखा । लेकिन मार्च तक युनियन और व्यवस्थापनके बीच एकभी मिटींग नही हुई । अप्रैलमे बहस टूटी और इसलिए SPKMF के सदस्योंने कृती कार्यक्रमोंकी शृंखला चलायी । इसमे रॅली निकाली, फॅक्टरीके गेटके सामने मजदूरोंके परीवारोंने और लॅंपंगके अन्य फॅक्टरीयोंके मजदूरोंने SPKMF के समर्थन मे निदर्शन किये । किरीन मिवॉनका वेतनकी बहसके अधिकारके लिए चलाया गया यह संघर्ष प्रातिनिधीक है जो इंडोनेशियाके सभी औद्योगिक संघर्षोंका प्रतिनिधीत्व करता है जहां मजदूरोंके वेतनकेलिए बहसके अधिकारको नाकारा जाता है । …»
2004 मे जैसेही भारतके डायनॅमिक्स डेअरी इंडस्ट्रीजमे यु एसके स्क्रेइबर फूड्स इन्कॉर्पोरेशनको 51 प्रतिशत हिस्सा मिला, भारतका एक अग्रीम दूध प्रक्रिया प्लॅंट एक जागतिक कंपनीमे तबदील हो गया ।
स्केइबर चीजके उत्पादनोंके अलावा फॅक्टरी ब्रॅंडेड डेअरी पेय तथा नेस्ले, जीएसके, पेप्सीको और युनिलिव्हर जैसी प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियोंकेलिए शीतपेय बनाती है । भारतभरमे मॅकडॉनल्ड्स तथा पिझ्झा हटमे चीझकी सप्लायभी इसी फॅक्टरीसे होती है ।
कटींग एज तकनीकके तथा वैश्विक ब्रॅंडके उत्पादनकेलिए नइ लागतके बावजूद स्क्रेइबर डायनॅमिक्स डेअरीज कॉप्लेक्समे सभी प्लॅंट्समे मिलकर आधेसे ज्यादा मजदूर ठेका मजदूरीमे है – 393 मजदूर ठेका मजदूर है और 384 मजदूर स्थायी मजदूर है । कुल 128 मजदूर महिलाओंमे 125 महिला ठेका मजदूर है और सिर्फ 3 महिला स्थायी मजदूर है । …»
युनायटेड स्टेट्सके मजदुरोंने आठ घंटेके दिनके लिए एक मई इस दिनसे संघर्ष शुरु किया था और 1980 से विश्वभरमे यह आंतरराष्ट्रीय मजदुर दिन कहकर मनाया जाने
लगा । इसकी ताकद उसके विश्वव्यापी स्वरुपमे है । यह वह दिन है जब विश्वके सभी मजदुर एकसाथ उनके समान उद्देशोंकेलिए संघर्ष के प्रति अपनी कटीबद्धता जाहीर करते है । …»
भारतके पश्चिम बंगालके नॅवडा नदीके चाय बागानके मजदुरोंको गये साल 14 सितंबरसे 12 दिसंबरतक बिना वेतन, राशन और खानेके रहना पडा । अगस्तमे 8 महिनेकी गर्भवती श्रीमती आरती ओराँवको मॅटर्निटीकी छुट्टी नकारी गयी और उससे जबरदस्तीसे चायके पत्ते तोडनेका काम करवाया गया । व्यवस्थापनके इस ज्यादतीके खिलाफ मजदुरोंने किये निदर्शनोंके बाद बागान बंद रखकर उन्हे एकसाथ सजा दी गयी ।
निदर्शनोंकी जबाबमे व्यवस्थापनने बागानका काम दो सप्ताहोंतक बंद रखा । 8 सितंबरको बागान फिरसे खोला गया वो भी इस शर्तपर की निदर्शनोंके लिए जिम्मेदार ठहराये गये 8 मजदुरोंको निलंबित करके उनकी पुछताछ की जायेगी और उनपर कारवाई की जायेगी। व्यवस्थापनने 14 सितंबरको बागान फिरसे बंद किया । …»
भारतमे नेस्लेका सबसे नया (2005) और सबसे बडा प्लँट जो पंतनगरमे स्थित है, वहां 5 जनवरीको कामगारोंके वेतन तथा अन्य सहुलतोंपर पहले सांझा समझौतेपर हस्ताक्षर किये गये जिसमे अन्य तीन सहयोगी प्लँटकी युनियन्सभी आय यु एफसे संलग्न फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया नेस्ले एम्प्लॉइजके साथ जुड गयी । और आखिर नौकरी की शर्तोंके बारेमे बहस के अधिकारको हासील कर लिया जिसे व्यवस्थापनने व्यावसायिक गोपनीय बात करार दिया था । …»
कामगार, उनकी युनियन और फेडरेशन ऑफ फूड अँड टुरीझम वर्कर्स ऑफ टुनेशिया (FGAT) नेसले की एक आइसक्रीम फॅक्टरीकी गुप्ततासे की गयी बिक्रीकी जानकारीकी माँग करते हुए ।
3-4 दिसंबरको हुए हडतालके बाद लेबर इन्स्पेक्टरकी निगराणीमे की गयी मध्यस्थता असफल रही । तब कार्थेजके नेस्ले आइसक्रीम फॅक्टरीके सभी कामगारोंने फिरसे 27 से 30 दिसंबरको हडताल की । …»
करीब 1200 कामगारोंका प्रतिनिधीत्व करनेवाली भारतके मोगा, पोंडा तथा बिचोलिमके नेस्ले फैक्टरियोंके मजदुरोंकी युनियनको 2009 के आखरी सप्ताहमे बडी जीत हासील हुइ । सालभर चल रहे उनके वेतनकी बहसके अधिकारके दिर्घ संघर्षके बाद पहली बार युनियनने वेतन तथा अन्य सुविधाओंके सांझे समझौतेपर दस्तखत किये । लंबे अर्सेसे चल रहे उनके संघर्षकी यह बहुत बडी उपलब्धी है । समझौतेमे वेतनश्रेणी तथा वेतनकी जानकारीकोभी शामील किया है जो की व्यवस्थापनने पहले ‘ गोपनीय ’ करार दी थी । यह उपलब्धी और भी स्पृहणीय है क्युंकी नेस्ले इंडीया के व्यवस्थापनने पोंडा़ गोवा की युनियनको मान्यता देनेसे इऩकार किया था जब 2001 मे उसकी स्थापना हुइ थी । और फिर यह एक कानुनी मुकदमा बना जो व्यवस्थापनने करीब 54 बार सुनवाई रुकवाकर आठ सालतक जानबुझकर चलाया । …»
टाटा, वह भारतीय ट्रान्सनॅशनल कंपनी जो बनाती है विश्वविख्यात टेटले चाय, ने पेटकी भूखके जरीये बंदी बनाके (होस्टेज) रखे 6500 लोग । भारतके पश्चिम बंगालके नोवडा नड्डीके चाय बागानमे काम करनेवाले 1000 कामगार और उनके परीवारके सदस्योंपर यह आफत आयी है । हमेशाही आधे पेट रहते आये इन कामगारों और उनके परीवारके सदस्योंको अगस्टके शुरू से हुए लॉक आउटने अब भूखमरीकी छोरपर ढकेला है जिसने उन्हे उनकी मजदुरीसे वंचित रखा है । उन्हे दी गयी इस संगठित सजाका मक्सद है कामगारोंको भूखा रखे ताकि वे उनके मूलभूत मानवी अधिकारोंको, जिसमे गाली-गलोच एवं शोषणका निषेध करनेका अधिकारभी है , त्याग दे । …»
युनिलिव्हर और आय. यु. एफ. के बीच चर्चासे हुए समझौतेने खानेवाल, पाकिस्तान स्थित कंपनीकी लिप्टन/ब्रुकबाँड चाय फॅक्टरीमे काम कर रहे अस्थायी मजदुरोंके हकोंके बारेमे लंबे अरसेसे चह रहे संघर्षका हल निकाला । बहुराष्ट्रीय कंपनियोंके लिए बनायी गयी OECD मार्गदर्शक तत्वोंके अंमलके लिए जिम्मेदार युकेके नॅशनल कॉन्टॅक्ट पॉइंटके सकारात्क हस्तक्षेपसे यह समझौता हुआ । खानेवालके मजदुरोंके तथा उनके चल रहे संघर्षकेलिए आंतरराष्ट्रीय स्तरपर समर्थन पानेके लिए चलाये गये अभियानके तहत इस साल मार्चमे आय. यु. एफ.ने OECD को अपनी मांगे सादर की थी ।
सिर्फ 22 कर्मचारियोंको युनिलिव्हरके कर्मचारीकी हैसियतसे काम देकर और ठेकेदारोंसे कामपर रखे गये सेकडों अस्थायी मजदुरोंको “ काम नही तो मजदुरी नही ” इस व्यवस्थामे कामपर रखकर खानेवाल फॅक्टरी बडी तादादमे अस्थायीकरणके जरीये ट्रेड युनियनके मुलभूत अधिकारोंके नकारे जानेका सशक्त प्रतीक बनी रही । खानेवाल फॅक्टरीमे काम कर रहे अस्थायी मजदुरोंको युनिलिव्हरके कर्मचारियोंकी युनियनका सदस्य बननेसे तथा उनके असली मालिक युनिलिव्हरके साथ सांझा बहसके संबंधोंमे शामील होनेसे कानूनी तौरपर बाहर रखा था । …»
युनियनकी दमनके खिलाफ चल रही हडतालने नेस्ले हाँगकाँगके व्यवस्थापनको युनियनको मान्यता देने तथा युनियनसे बातचीत करनेके लिए मजबूर तो किया लेकिन आय यु एफ से संलग्न हाँगकाँग नेस्ले वर्कर्स युनियनका यह मूलभूत अधिकार आजभी नकारा जा रहा है ।
इस युनियनकी स्थापना जुलाई 2008 मे हुई जब कामगारोंने अवमानकारक कामगार प्रथाका निषेध व्यक्त करनेके लिए हडताल की थी । फरवरी 2009 मे इस युनियनने
अपने अस्तीत्वके लिए संघर्ष किया, जब कंपनीने युनियनके अध्यक्ष चान पाँग यीन को सस्पेंड करके युनियनपर आक्रमक हमला किया था । अस्थायी मजदुरोंको कायम करानेके तथा अच्छे व्यावसायिक संबंध बनाये रखनेके हेतुसे युनियनने हडताल पिछे ली उसके दोही सप्ताह बाद व्यवस्थापन इस बेहुदा आक्रमक प्रतिसादपर उतर आया । व्यवस्थापन चान पाँग यीन को तथा उसके साथ सस्पेंड किये अन्य एक मजदुरका निलंबन पिछे लेतेही युनियनने हडताल तुरंत खत्म किया । …»