भारतके पश्चिम बंगालके नॅवडा नदीके चाय बागानके मजदुरोंको गये साल 14 सितंबरसे 12 दिसंबरतक बिना वेतन, राशन और खानेके रहना पडा । अगस्तमे 8 महिनेकी गर्भवती श्रीमती आरती ओराँवको मॅटर्निटीकी छुट्टी नकारी गयी और उससे जबरदस्तीसे चायके पत्ते तोडनेका काम करवाया गया । व्यवस्थापनके इस ज्यादतीके खिलाफ मजदुरोंने किये निदर्शनोंके बाद बागान बंद रखकर उन्हे एकसाथ सजा दी गयी ।
निदर्शनोंकी जबाबमे व्यवस्थापनने बागानका काम दो सप्ताहोंतक बंद रखा । 8 सितंबरको बागान फिरसे खोला गया वो भी इस शर्तपर की निदर्शनोंके लिए जिम्मेदार ठहराये गये 8 मजदुरोंको निलंबित करके उनकी पुछताछ की जायेगी और उनपर कारवाई की जायेगी। व्यवस्थापनने 14 सितंबरको बागान फिरसे बंद किया । …»
भारतमे नेस्लेका सबसे नया (2005) और सबसे बडा प्लँट जो पंतनगरमे स्थित है, वहां 5 जनवरीको कामगारोंके वेतन तथा अन्य सहुलतोंपर पहले सांझा समझौतेपर हस्ताक्षर किये गये जिसमे अन्य तीन सहयोगी प्लँटकी युनियन्सभी आय यु एफसे संलग्न फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया नेस्ले एम्प्लॉइजके साथ जुड गयी । और आखिर नौकरी की शर्तोंके बारेमे बहस के अधिकारको हासील कर लिया जिसे व्यवस्थापनने व्यावसायिक गोपनीय बात करार दिया था । …»
कामगार, उनकी युनियन और फेडरेशन ऑफ फूड अँड टुरीझम वर्कर्स ऑफ टुनेशिया (FGAT) नेसले की एक आइसक्रीम फॅक्टरीकी गुप्ततासे की गयी बिक्रीकी जानकारीकी माँग करते हुए ।
3-4 दिसंबरको हुए हडतालके बाद लेबर इन्स्पेक्टरकी निगराणीमे की गयी मध्यस्थता असफल रही । तब कार्थेजके नेस्ले आइसक्रीम फॅक्टरीके सभी कामगारोंने फिरसे 27 से 30 दिसंबरको हडताल की । …»
करीब 1200 कामगारोंका प्रतिनिधीत्व करनेवाली भारतके मोगा, पोंडा तथा बिचोलिमके नेस्ले फैक्टरियोंके मजदुरोंकी युनियनको 2009 के आखरी सप्ताहमे बडी जीत हासील हुइ । सालभर चल रहे उनके वेतनकी बहसके अधिकारके दिर्घ संघर्षके बाद पहली बार युनियनने वेतन तथा अन्य सुविधाओंके सांझे समझौतेपर दस्तखत किये । लंबे अर्सेसे चल रहे उनके संघर्षकी यह बहुत बडी उपलब्धी है । समझौतेमे वेतनश्रेणी तथा वेतनकी जानकारीकोभी शामील किया है जो की व्यवस्थापनने पहले ‘ गोपनीय ’ करार दी थी । यह उपलब्धी और भी स्पृहणीय है क्युंकी नेस्ले इंडीया के व्यवस्थापनने पोंडा़ गोवा की युनियनको मान्यता देनेसे इऩकार किया था जब 2001 मे उसकी स्थापना हुइ थी । और फिर यह एक कानुनी मुकदमा बना जो व्यवस्थापनने करीब 54 बार सुनवाई रुकवाकर आठ सालतक जानबुझकर चलाया । …»
टाटा, वह भारतीय ट्रान्सनॅशनल कंपनी जो बनाती है विश्वविख्यात टेटले चाय, ने पेटकी भूखके जरीये बंदी बनाके (होस्टेज) रखे 6500 लोग । भारतके पश्चिम बंगालके नोवडा नड्डीके चाय बागानमे काम करनेवाले 1000 कामगार और उनके परीवारके सदस्योंपर यह आफत आयी है । हमेशाही आधे पेट रहते आये इन कामगारों और उनके परीवारके सदस्योंको अगस्टके शुरू से हुए लॉक आउटने अब भूखमरीकी छोरपर ढकेला है जिसने उन्हे उनकी मजदुरीसे वंचित रखा है । उन्हे दी गयी इस संगठित सजाका मक्सद है कामगारोंको भूखा रखे ताकि वे उनके मूलभूत मानवी अधिकारोंको, जिसमे गाली-गलोच एवं शोषणका निषेध करनेका अधिकारभी है , त्याग दे । …»
युनिलिव्हर और आय. यु. एफ. के बीच चर्चासे हुए समझौतेने खानेवाल, पाकिस्तान स्थित कंपनीकी लिप्टन/ब्रुकबाँड चाय फॅक्टरीमे काम कर रहे अस्थायी मजदुरोंके हकोंके बारेमे लंबे अरसेसे चह रहे संघर्षका हल निकाला । बहुराष्ट्रीय कंपनियोंके लिए बनायी गयी OECD मार्गदर्शक तत्वोंके अंमलके लिए जिम्मेदार युकेके नॅशनल कॉन्टॅक्ट पॉइंटके सकारात्क हस्तक्षेपसे यह समझौता हुआ । खानेवालके मजदुरोंके तथा उनके चल रहे संघर्षकेलिए आंतरराष्ट्रीय स्तरपर समर्थन पानेके लिए चलाये गये अभियानके तहत इस साल मार्चमे आय. यु. एफ.ने OECD को अपनी मांगे सादर की थी ।
सिर्फ 22 कर्मचारियोंको युनिलिव्हरके कर्मचारीकी हैसियतसे काम देकर और ठेकेदारोंसे कामपर रखे गये सेकडों अस्थायी मजदुरोंको “ काम नही तो मजदुरी नही ” इस व्यवस्थामे कामपर रखकर खानेवाल फॅक्टरी बडी तादादमे अस्थायीकरणके जरीये ट्रेड युनियनके मुलभूत अधिकारोंके नकारे जानेका सशक्त प्रतीक बनी रही । खानेवाल फॅक्टरीमे काम कर रहे अस्थायी मजदुरोंको युनिलिव्हरके कर्मचारियोंकी युनियनका सदस्य बननेसे तथा उनके असली मालिक युनिलिव्हरके साथ सांझा बहसके संबंधोंमे शामील होनेसे कानूनी तौरपर बाहर रखा था । …»
युनियनकी दमनके खिलाफ चल रही हडतालने नेस्ले हाँगकाँगके व्यवस्थापनको युनियनको मान्यता देने तथा युनियनसे बातचीत करनेके लिए मजबूर तो किया लेकिन आय यु एफ से संलग्न हाँगकाँग नेस्ले वर्कर्स युनियनका यह मूलभूत अधिकार आजभी नकारा जा रहा है ।
इस युनियनकी स्थापना जुलाई 2008 मे हुई जब कामगारोंने अवमानकारक कामगार प्रथाका निषेध व्यक्त करनेके लिए हडताल की थी । फरवरी 2009 मे इस युनियनने
अपने अस्तीत्वके लिए संघर्ष किया, जब कंपनीने युनियनके अध्यक्ष चान पाँग यीन को सस्पेंड करके युनियनपर आक्रमक हमला किया था । अस्थायी मजदुरोंको कायम करानेके तथा अच्छे व्यावसायिक संबंध बनाये रखनेके हेतुसे युनियनने हडताल पिछे ली उसके दोही सप्ताह बाद व्यवस्थापन इस बेहुदा आक्रमक प्रतिसादपर उतर आया । व्यवस्थापन चान पाँग यीन को तथा उसके साथ सस्पेंड किये अन्य एक मजदुरका निलंबन पिछे लेतेही युनियनने हडताल तुरंत खत्म किया । …»
एक्झीक्युटीव्ह पे (व्यवस्थापकीय अधिकारियोंके वेतन तथा इन्सेन्टीव्ह) मे कटौती करनेके बारेमे आनेवाले कानूनके मसुदेपर सरकारके साथ चर्चाके समय नेसले अध्यक्ष पीटर ब्रॅबेकने विश्वकी सबसे बडी इस खाद्य उत्पादक कंपनीको स्वीत्झर्लंडसे बाहर ले जानेकी स्पष्ट रुपसे जाहीर धमकी दी । साप्ताहिक सॉनटॅग को 13 सितंबरको दिये इंटरव्ह्युमे ब्रॅबेक कहते है, “ शायद हमारे लिए यह सही जगह नही है ”। एक्झीक्युटिव्ह पे के प्रस्तावित कानूनको वे, “अंत की शुरुवात ” कहते है ।
नेसलेके व्यवस्थापकीय अधिकारियोंने 2008 मे 14 दशलक्ष स्वीस फ्रॅंक्स कमाये और ये गये सालसे ,जब बाजारमे तेजी थी, 3 दशलक्ष ज्यादा है (स्टॉक ऑप्शन्सका शुक्रिया ) । नेसलेके उच्चाधिकारियोंके वेतन, कंपनी जिसे बडी चतुरतासे ‘ क्रिएटिंग शेअर्ड व्हॅल्यु ’ का नाम देती है, उसमे आता है । (जबकी कामगारों तथा उनकी युनियन्सको उस व्हॅल्यु मे शेअरके अधिकारको पानेके लिए हमेशाही संघर्षशील रहना पडा है ।) अर्थात, ब्रॅबेकका लेनादेना कानूनके नियमसे है, उसके अपने जेबसे नही । वो कहते है, “स्वीत्झर्लंडकी पहचान ऐसी माँगोंको दाने डालनेकी नही थी । ” जैसे एक सप्ताह पहले स्वीस बिझनेस फेडरेशनके वार्षिक सभा मे उन्होने कहा था, “बनाना रिपब्लिकमे लोकप्रियता पानेके लिए कानून बदले जाते है । ” …»
ताजा कॅज्युअल-टी : युनिलिव्हर लेबर कॉन्ट्रॅक्टरके रिश्तेदारोंने किये हमले के बाद खानेवाल ऍक्शन कमिटीके सदस्य अब्दुल अझीझ अस्पतालमे दाखील ।
गये दो दशकोंसे युनिलिव्हर पाकिस्तानके लिप्टन चाय फॅक्टरीमे चल रहे डिस्पोजेबल जॉब की प्रथाको चुनौती दी जानेके कारन अबतक लाभदायक रहा लेबर सप्लायका ठेका हाथसे निकल जानेकी संभावना बढतेही ठेकेदारोंने फॅक्टरी व्यवस्थापनके साथ जाल बिछाकर, युनिलिव्हरसे सिधे तथा स्थायी नौकरीके हकोंके लिए लड रहे कामगारोंपर हिंसक हमले करवाना शुरु किया है । आय. यु. एफ. ने OECD के पास खानेवालमे युनिलिव्हर द्वारा अस्थायी कामगारोंके हो रहे बढते तथा निरंतर इस्तेमालसे बहुराष्ट्रीय कंपनियोंके लिए OECD ने बनाये गाइडलाइन्स (मार्गदर्शक तत्व) का उल्लंघन होनेकी शिकायत दर्ज की थी । उस शिकायतपर OECD के युके नॅशनल कॉन्टॅक्ट पॉइंटने सरकारी हस्तक्षेपसे चर्चा करके कुछ निर्णय लेनेका आवाहन किया, उसके बाद लेबर कॉन्ट्रॅक्टर्सका यह उकसाना शुरु हुआ । …»
चिंचुला चाय बागान भारतके उत्तरी पूर्वमे उत्तर बंगालके डुअर्स क्षेत्रमे स्थित है । चाय बागानोंपर आयी आपत्तीके समय मालिकने पहले नवंबर 2003 मे यह चाय बागान बंद किया और जून 2004 मे इसे फिरसे खोला गया । नवंबर 2005 मे यह बागान फिरसे अनिश्चित समयके लिए बंद किया गया । …»